सनातनी नारी अधिकार याचक, कि महाशक्ति

हम ८ मार्च अंतरराष्ट्र्यि नारी दिवस के अवसर पर हरसाल मेर नेपाली औ विदेशी कुछ महिलन का शुभकामना इमेल भेजेन । जादातर महिलन से धन्यवाद सहित शुभकामना आदान प्रदान भवा लकिन क्यालीफोर्निया कै हमार दुइ महिला प्रोफेसरन केर न तौ कोई प्रतिक्रिया आई औ न तौ कलेज मा कोई कार्यक्रम भवा न तौ शहर मा कोई उत्सव देखान । ई सामान्य बात आई गई होय गै । लकिन करीब महिना भर बाद उनही महिलन के साथे कैंन्टीन मा प्रसंगवश अँग्रेजी शिष्टाचार कै बात चली तौ हम अपने शुभकामना कै उत्तर न पावै केर उलाहना दय बैठेन । उइलोग हँसै लागीं औ कहिन ई सब कम्युनिष्टन केर चोंचला होय जौन एशियई देशमा फैलावा गवा है । यूरोप अमेरिका मा भला कौन महिला अधिकारविहीन है जौ हियाँ नारा जुलूस औ भाषण होय < उनके बातन से हमका कुछ वर्ष पहिले यही दिवस के दिन भारत दिल्ली महिला सम्मेलन कै प्रमुख अतिथि सर्वाेच्च अदालत कै प्रधान न्यायधीश के भाषण केर एक अंश याद होय आवा जिमा उइ कहिन रहैं कि भारतीय नारिन केर स्थान तौ पुरुष से ऊँच है , उनका तौ देबी कहा गा है । बुद्धि औ ज्ञान माता सरस्वती औ गायत्री, धन कै अधिष्ठात्री माता लक्ष्मी औ शक्ति औ सुरक्षा माता दुर्गा या काली के हाथेम है, पुरुष के तीर तौ कुछ नाइ है । ऊ कुशल सारथी जरुर होय । लकिन यहै नारी से जब ई कहवावा जात है कि हम पुरुषन के बराबर हन औ संविधान केर हवाला दइकै जब अदालत मइहन बराबरी केर दावा करत हैं तब उइ तौ अपने का निम्नतर स्थिति मा लै जाय के बात करत हैं औ हमका बडा तरस आवत है, दुख लागत है । अँग्रेजन के प्रत्यक्ष या परोक्ष संलग्नता या प्रभाव मा जतने देशन केर कानून औ संविधान बनत हैं सब मा उनकै स्वार्थ औ राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक, सामाजिक प्रभाव बिस्तार छिपा रहत है । ई लोग समाजवाद नाम केर शब्दास्त्र प्रयोग करत हैं औ माकर््सवादी शब्दजाल अतने मनभावन होत हैं कि भले उनकै उपनिवेश न होय तबहूँ देश औ देशबासी दिन पर दिन पश्चिम केर गुलाम होतै जात हैं औ बडे बडे विद्वानौं इमा फँसि जात हैं । गाधी, नेहरु, औ अम्बेडकर आदि लंदन केर पढे तमाम नेता औ उनका आदर्श मानैवाले बिशेश्वर प्रसाद कोइराला आदि बडे बडे नेपाली नेता तक एैसै शव्दजाल मा फँसे रहैं । लकिन कम्युनिष्ट औ समाजवादिन केर सबसे बडी बाधा काव होय < समझा जाय । अँग्रेज लोग भारतमा साढे तीन सय वर्ष राज करैक बावजूद औ भारत केर टुकरा करैक बावजूद उइलोग भारतीय मस्तिष्क का गुलाम नाय बनाय पाइन् । इकै सबसे बडा कारक तत्व, जैसन कि लार्ड मैकाले लंदन के संसद मा व्याख्या किहिन रहैं, उइलोग हिन्दुवन कै नैतिक औ परम्परागत मूल्य, औ संस्कार व्यस्थाका बहुत खतरनाक मानत हैं । जिकै आधार होय सनातन परिवार व्यवस्था औ परिवार केर धुरी होय नारी शक्ति । ई परिवार व्यवस्था व्यक्ति, समाज औ राज्य का बाँधि के धार्मिक, साँस्कृतिक औ राष्ट्र्यि एकता बनाए राखत है, जिमा नारी केर भूमिका प्रमुख होत है । ई नाते क्रिश्चिनियटी साम्राज्यवाद के काँधे पर चढिकै हमलोगन के परिवारका तूरिके बिखरावैक मुख्य रणनीति बनाए है । जिके खातिर संयुक्त राष्ट्र्संघ औ इकै एजेनसिन का प्रयोग कीन जात है कुछ उदाहरण देखा जाय । १, मानव अधिकार घोषणापत्र के माध्यम से महिलन का स्वास्थ्य अधिकार के नाम पर गर्भ पतन, परिवार नियोजन, सम्बन्ध बिच्छेद, लिविंग टुगेदर, स्कूलनमा किशोर किशोरिन का यौन शिक्षा आदि पश्चिमी कुव्यवस्था यी क्षेत्र मा फैलावत हैं जो कि बिजुली मेर बडी तेज चमकदार तौ है लकिन एक तौ इकै उजेर स्थायी नाइ है औ दूसर बात ई होय चिर्री अर्थात गाज । जहाँ गिरी हुवाँ सर्वनाशै होई । इससे पश्चिमी देशनमा परिवार टुटे हैं, आदमी अकेल निरीह प्राणी होइगा है औ चर्च के भोजन वस्त्र के सहारे जियत है । इका तौ हम सबकोई देखित है, फिर काहे हम अँधरियान हन । २, क्रिश्चिनियटी केर रथ होय पश्चिमा समाजवादी मानव अधिकार । लकिन मजेदार बात ई है कि खुद अमेरिका इका नाय मानत है , ऊ अपने हियाँ पूँजीवाद का लागू किहे है । लकिन हमरे देशन मा समाजवादके नारा का युनीसेफ के नियम औ पाठ््यक्रम से मजबूत बनावैम सब पश्चिमी लोग लाग है । पश्चिमी सोंच, मान्यता औ ज्ञान का ऊँच, औ विकसित देखाय के, हमरे सोंच, मान्यता औ ज्ञान का छोट, कमजोर, खराब बतायके हमरे मन मस्तिष्क मा हीन भावना पैदा कइकै पश्चिमी शिक्षा औ संस्कृति का हमरे शिक्षा व्यवस्था केर आधार बनावा जात है । हमलोगन केर शास्त्र औ परम्परागत शिक्षा व्यवस्था बहुतै वैज्ञानिक औ शक्ति स्पूmर्तिदाता मौलिक औ व्यवस्थित औ मानवोेचित है । जिमा धर्म औ विज्ञान का परस्पर अंतरनिर्भर माना जात है लकिन उइलोग धर्मभीरुता औ धर्मांधता के चलते धर्म औ विज्ञान का परस्पर विरोधी बताय के हमरे धर्म के प्रति हमरे मनमा घृणा फैलायके धर्म ,संस्कार, नैतिकता औ मर्यादा का तूरत हैं जिकै शिकार हिन्दू नारी समाज भवा है । ३, हमरे सभ्यता मा सर्वे भवन्तु सुखिन ……..। शास्त्रीय वचन है जिमा मानव, पशु पक्षी, वन, जल, वायु, पहाड अर्थात समस्त जगत केर हित मा सोंच बनी है, लकिन ई बात कोई नाय देखत है औ पश्चिमा लोग संयुक्त राष्ट्र् संघ के माध्यम से एक आकर्षक शव्द गढिन है sustainable Develpoment अर्थात दिगो या स्थायी या सतत विकास । ईमा पर्यावरण सुरक्षा, जैविक विविधता, नारी औ बाल अधिकार , ग्लोबल वारमिंग,औ अंतरराष्ट्र्यि नागरिकता केर मानक निर्धारित कइकै एैसा बनाइन है कि हमरे जैसे देश आपन शास्त्र औ शब्द भूलिके इनके शव्दजालमा फँसि गए है. । कुछ देश जैसे चीन, जापान, कोरिया, रसिया औ कतिपय मुश्लिम देश जौन पहिले अग्रेजी शव्दजालमा फँसे तौ जरुर, लकिन सजग होइगे औ अँग्रेजी के जगह पर अपने भाषा संस्कृति केर सहारा लइकै अपनेका महाविनाश से बचाय लिहिन हैं औ द्रुत विकास किहिन हैं । ई नाते यी देशनमा महिलन केर विकास औ नेतृत्वमा सहभागिता कै कानून केर विकास, अपने सभ्यता औ संस्कार के आधार पर होत है । ४, वैसै तौ वैदिक कालीन औ सनातनी साहित्य मा बेधर्मी ताकतन के चलते बहुत मिलावट भय है लकिन तबहू पश्चिमी ज्ञान विज्ञान से आजौ यी बहुतै आगे है औ नारी जाति के उत्थान केर रस्ता बतावत है, संरक्षण औ सम्बर्धन करत है । मध्य युगमा छुवाछूत के साथे एक भ्रान्ति यहौ फैलाई गै कि नारी जातिका वेद पढैक औ गायत्री मंत्र जपै केर अधिकार नाइ है । ई बिल्कुल भूmठ गढा गा रहै । सनातन केर मूल ग्रन्थ औ विश्व कै सबसे पुरान ग्रन्थ वेद औ स्मृति सहित औरौ कुछ ग्रन्थन केर थोरी बात प्रमाण के खातिर एक झलक भर देखा जाय । -क_,प्राचीनकाल मा, गार्गी ,मैत्रेयी, मदालिसा, गौतमी, अपाला, लोपामुद्रा, अरुन्धती,सुलभा, शाश्वती, उशिजा, सावित्री, अदिति, शची,अनुसुया,देवयानी, देवहूति,अहिल्या, कुन्ती, सतरुपा, वृन्दा, मन्दोदरी, तारा, द्रोपदी, दमयन्ती, प्रतिशेधी, वैशालिनी, बैदुला, सुनीति, शकुन्तला, पिन्गला, जरुत्कार, रोहिणी, भद्रा, विदुला, गान्धारी, अन्जनी, गायत्री, सीता,पार्वती, सत्यवती, शैब्या, शुकला आदि ऋषिका प्रख्यात रहीं हैं । ई वेद केर मंत्रद्रष्टा भी रहीं औ वेद पर व्याख्यान देत रहीं । - पं_ श्रीराम शर्मा आचार्यद्वारा लिखित गायत्री महाविज्ञान के पृष्ठ ३२ और ३७) । -ख_, ऋग्वेद दशम मण्डल कै सूक्त ८५ कहत है कि ई सूक्त की ऋषिका सूर्यपुत्री सूर्या या सावित्री हैं । ऋग्वेद ५।२८,८।९१, १०।१३४, १०।३९,४०,९१, १०।९५, १०।१०७, १०।१०९, १०।१५४, १०।१५९, १०।१८९, आदि सूक्तन केर मंत्रद्रष्टा गृहस्थ ऋषिका अर्थात नारी लोग होंय । -ग_,ऋग्वेद ६।४४।१८ – सब बालबालिकन का विद्या पढायके समृद्धवान बनावेक राजा केर कर्तव्य है । ६।४४ ।१८१–सब बालबालिकन का पंडित बनावब विद्वानन केर योग्यता केर कसी होय । यही के १०।१९।३ मा ईश्वर कै संदेश है कि हे नर नारी ई सब मंत्र औ ग्रन्थ हम तुमलोगन का दीत है । ५।८ औ ८।३१ मा जौन पति पत्नी यज्ञ करत हैं उनका धन कै अभाव नाय होत है । ८।३३ मा स्त्रीहि ब्रह्म बभुविथ उचित नियम का पालन करैवाली स्त्री ब्रह्म पद पावत हैं अर्थात यज्ञ करावैक अधिकारी होत है । यजुर्वेद मा एमा ब्रह्मा पीपही सौभाग्यप्राप्ति के खातिर वेदमंत्र पान करती रहौ कहा गा है, और यही यजुर्वेद ११।३६, ६।१४, ११।५९ औ ऋग्वेद १।१५।२६ – नारी शिक्षा केर बात है । औ वैदिक काल मा कहूँ सती प्रथा नाइ है । (सती तौ भारत मा मुश्लिम शासन के समय केर उपज होय) । -घ_, मनुस्मृति ३।५७ –जौने परिवारमा बेटियाँ औ बहू दुख पावत हैं ऊ परिवार केर पतन होइ जात है । ३।११४– नवविवाहित बहुरिया, कन्या, रोगिनी औ गर्भवती का पहुनौ से पहिले भोजन करावा जाय । ३।५६– यत्र नाय्र्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता । यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाःक्रियाः ।। जहाँ नारी की पूजा होत है हुवाँ देवता रहत हैं औ जहाँ नाय होत है हुवाँ पुण्यकर्म निस्फल होइ जात हैं । ३।५७ से ३।६६ तक नारी सम्मान केर बात है । ९।५५ से ९।६० तक – परिवार औ समाजमा नारी पूजा के योग्य है । ९।१३०–पुत्र औ पुत्री एक समान हैं, पुत्री आत्मास्वरुप है । ९।२६,२७,२८मा नारी जाति का लक्ष्मी औ पूजनीय तथा महान बतावा गा है । -ङ_, महाभारत के शल्य पर्व ४२।२, ५४।६, औ शान्ति पर्व ३२०, १८१, १८३ मा नारी का उच्च स्थान दीन गा है । तैतरीय संहिता २।२।२।६ मा अयज्ञो वा एथ योऽपत्नीक अर्थात बिना पत्नी के यज्ञ नाय होत है एैसन कहा गवा है । इतौ बहुत थोरा उदाहरण है । हिन्दू दर्शन नारी महिमा से भरा परा है । समय समय पर भारत पर कब्भौ मुसलमान आक्रमणकारी तौ कब्भौ अँग्रेजी हुकूमत औ उनकै अपन स्वार्थ के नाते सनातन धर्मावलम्बिन केर पुरातन औ वैज्ञानिक मूल्य मान्यतन का चोट दीन जात रहा है । वहै दुष्प्रभाव हमरेव उप्पर परा है । उइलोग जोर बल लगायके, समझाय बुझाय के,औ सब तरह से सनातन धर्म संस्कृति चलन औ व्यवहार का दबाइन, रोकिन, बदलिन, बिगारिन औ नष्ट किहिन औ जौन ऊ लोग चलाइन औ चलै दिहिन ऊ समय के लोग वही से समझौता करत गए औ तीन चार पुस्ता के बाद लोग अपन सही बात भुलायगे औ उनकै स्वीकृत चलन व्यवहारका मान लिहिन कि यहै हमार चलन होय । जिससे पाछे आवैवालै पुस्ता भ्रममा परिगे औ आज तक वहै हाल है । दुनिया केर जतने प्रमुख मजहब या पंथ हैं तिनमा धर्म औ धर्मग्रन्थन के विषयवस्तु के विरुद्ध मइहन कुछ नाय बोला जाय सकत है । ऊ सब बन्द व्यवस्था होय लकिन सनातन यानी हिन्दुत्व मा कोई भी शास्त्र औ देवी देवता या पद्धति के बारेम खुल्ली बहस करैक चलन औ अधिकार है । इमा एक बात हमेशा याद रखैवाली है कि मूल सिद्धान्त माने वेद का छोडिके और चाहेजौन शास्त्र से स्वीकृत चलन मा समयानुकूल संशोधन केर प्रचलन है । इके खातिर शंकराचार्य, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर महाकुंभ औ धर्मसंसद, आदि संस्था सक्रिय हैं । रामायणकालमा अहिल्या केर स्वधर्म वापसी, भीलनी शेबरी द्वारा राम कै स्वागत आदि उदाहरण हैं । ई वास्तविकता का समझा जाय, अपन मौलिक दर्शन औ ज्ञान का जीवन मा उतारैक कोशिस कीन जाय । अब के प्रजातान्त्रिक युगमा जबकि विचार स्वतन्त्रता है औ हमहु लोगनका भी कुछ अक्किल, बुद्धि आयगै है तौ हम दोसरे केर अनुपयोगी विचार का अपने उपर काहे लादी, अपने पुरिखन केर गलती या कमी कमजोरी काहे न सुधारी, औ काहे अपन औ अपने बच्चेन केर भविष्य बिगारी । धर्म क्षेत्र के पंडित, नेतृत्वदाता लोग, वेद औ षटदर्शन के जानिस्कार लोग सही व्याख्या काहे नाय सुनावत हौ < शास्त्रीय अपव्याख्या का आधार मानिके रुढिवादिता आत्मप्रवंचना औ आत्ममुग्धता मा फँसे लोग आजौ अपन बानी व्यवहार काहे नाय सुधारत हौ < काहे छुवाछूत के विरुद्ध, औ नारी शिक्षा मा वेदाध्ययन औ गायत्री मंत्र जाप के वैदिक अधिकार केर वकालत मा आन्दोलन नाय छेडत हौ < यहै नारी तौ वेद केर तमाम मंत्रन केर मंत्रद्रष्टा होय । यानी अतनी महान शक्ति । यहीका अपवित्र, तुच्छ, औ अधिकारविहीन, शक्तिहीन माना जात है < कतना बडा गहन अंधकार ओढे हन हमलोग < अपने दिमाक मा भूसा भरे हन हमलोग < नारीका कमजोर बनावै के खातिर नारीका गायत्रीविहीन बनाय डारिन हैं । गायत्री माने महाशक्ति नारी, औ नारी का नारित्व से अलग कसकै कीन जाय सकत है < भला नमक से नमकीन औ मिठाई से मिठास कैसे निकारा जाय सकत है < कौन विद्या से कौन तर्क देहौ < सूरज का हथेली से कसकै मूंदि पइहौ < गायत्री सनातन केर प्राण होय . तीनौ वर्णकै स्त्री पुरुष, औ चौथा ब्राह्मणौ मइसे औरतनका अलग कइदेव तौ हिन्दू मा गायत्री जपैक अधिकारवाले खाली ब्राह्मण जाति केर मर्द कुल कै प्रतिशत बचत हौ < एक दुइ प्रतिशत < औ उनहू मा भला गायत्री जपत कै जने हैं < सब गायत्री जपतौ नाइ हैं । =)! Ü < अतने से सनातन धर्म बची भला < यहै सोंच औ व्यवहार से हिन्दू टूटत जैन, बौद्ध, सिख, और तमाम पंथ निकरत औ इस्लाम औ ईसाइत मा धर्मांतरित होत चले गए हैं । जागौ पंडितों औ जागरुक लोग जागौ, उठौ औ तनि के खडे होइ जाव । धोखा केर व्यवस्था पी लेव, सोंखि लेव अगस्त ऋषि के समुद्र पियै मेर, भगवान शंकर के विष पियै मेर कुव्यवस्था का पी लेव सत्य स्वीकारौ । धर्म संस्कृति बचाव । तब आपौ बचिहौ नाही तौ आपौ बहि जइहौ । याद रखौ नारी सनातन केर धुरी है औ नदी केर धार जब सहज रस्ता पर बहैक नाय पावत है औ खुदै आपन रस्ता चलैके खातिर संघर्ष करैक स्थिति आय जात है तौ नदी केर खाली किनारै नाय टूटत है, खेत, खलिहान, गाँव बस्ती सब बहाय जात है । नारी जौ कहूँ महाकाली बनैक अवस्था आई तौ समाज खाली चरमराई ना, कडकदार आवाज के साथ टूटि जाई तब एक कल्पनातीत घाटा होई जिकै समस्त अपयश कै भागीदार आप तथाकथित विद्वान या पंडितन का होयक परी लकिन तब कुछ न बची, न आप, न आप केर दम्भ औ न आपकेर यी अँधेर व्यवस्था । -(लेखक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, प्राध्यापक, राजनीति औ दर्शनशास्त्र कै अध्येता अधिवक्ताहोंय) ayodhya.p.shrivastav@gmail.com -->

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