-कपिलवस्तु से पच्छुँवै केर अवधी_
– अयोध्या प्रसाद श्रीवास्तव
-१_
कम्पनी कै एक वर्कर रोमा के पेटेम तनिक पीरा बढी तौ उनकै हाथ कालबेल पर चला गवा थोडी देर मइहन एमबुलेन्स आय गई औ रोमा “पेटेस बच्चा निकरुवावै”अस्पताल के आपरेशन थिएटर पहुंचाय दीन गर्इं । हुवाँ तमाम गर्भवती औरतैं लाइन से पहुडी रहैं । डाक्टर पेट सुन्न करै औ चीरिके बच्चा निकारत रहैं । नर्स महतारी औ बच्चा का लै जाय के वार्ड मा सुरक्षित पहुंचावत रहै । रोमा के पेटेस बिटिया निकारि के महतारी बिटिया दूनौ केर सम्बन्ध औ परिचय हाथेम पहिराय के सुरक्षित कै दीन गर्इं । समय के हिसाब से भाषौ मइहा बदलाव है अब मेहरुवन के बच्चा जलम नाय लेत हैं, पेटेम पलत बच्चा निकारे जात हैं ।
गर्भवती मेहरुवै कोई अपने निवास से तौ कोई काम पर से सोझै अस्पताल अपने सुविधा से खुदै चली जात हैं । बच्चा निकरुवायके एक दुई दिन रहिके फिर अपने निवास पर लौटि जात हैं । अस्पताल से दुइ चार दिन के बाद बच्चा शिशु संरक्षण गृह मा पठै दीन जात है । हुवां उमिर के हिसाब से ग्रुप बनाय के बच्चे पाले जात हैं ।
विज्ञान केर Artificial Intelligence (AI), Robotic कृतिम बौद्धिकता, रोबोट केर युग है । सन् २०७५ । मनई कहत है कि समय बढिया है । न घर कै, न परिवार, कोई केर चिंता कोइक नाइ है । मुश्किलै से कोई केर अपन घर है । नाई तौ एक कमरा, किचन,टोयलेट केर सुविधासहित अपार्टमेण्ट निवास के खातिर केराए पर मिलत हैं । मस्तराम, अकेलुवा जीवन । योग्यता अनुसार काम करौ । खाना मन लागै बनावो, या रेस्टुरेण्टेम खाओ, आनलाइन मंगाओ या स्टोर से डेब्बाबंद कुछ मंगाव, खाओ । बच्चा अस्पताल से शिशु घर, बाल घर, औ स्कूल केर छात्रावासम रहत रहत है, सयान होइ जाय तब काम पकरि के कहू‘ एक एपार्टमेण्ट लै लेत है । बात खतम ।
महतारी अपने निवास पर, औ बच्चे “पालनपोषण” घर मा । महतारी औ बच्चा पहिचानपत्र से परिचित हैं औ भेंट मुलाकात होन करत है । महतारी अपने छुट्टी के दिन बच्चा का लायके अपने साथे घुमावै केर चलन है । बाप जौ शरीरधारी मनई है, तौ उकै पहिचान महतारी जान सकत है । काहे से अब लरिका बिटियन के बीच मा शादी विवाह तौ कोई जानत नाइ है । लरिका लडकिन के शारीरिक भूख, जे जस चाहै जत्ते दिन, साथे मौज मस्ती करैक होय, कइकै बितावत है । फिर को कहां को कहां < औ नाई तौ मर्द मेहारु सुन्दर सुन्दरी रोबोट हइयय हैं । मनई साथी, औ काम चलाऊ प्रेमी प्रेमिका प्राकृतिक मनई काहे ढुँढै < परिवार बनावै केर तौ कल्पना होतै नाइ है । स्त्री जाति के इच्छा से पुरुष स्त्री के सम्पर्क मा आवत–जात हैं । बिल्कुल प्राकृतिक पशु प्रवृत्ति है, थोडा बहुत बन्दर से मिलत जुलत ।
वैसे बच्चा जनमावै केर कोई जरुरत तौ है नाई, लकिन जवान लडका बिटिया भेटघाट के मौके पर स्त्री जाति के मनमा आवै कि, लाव बच्चा जनमाय के देखा तौ जाय कस लागत है, तौ गर्भाधान होइ जात है । मर्द नेरे तेरे केर होय, परिचित है, सम्पर्क मा है तो स्त्री जानत है हि हमरे बच्चा केर बाप ई होय, नाही तौ पुरुष रमता जोगी बहता पानी होइ जाय तौ को पता लगावै < औ काहै पता लगावै < जब परिवार, नाता गोता, जाति, वंश, समाज, कुछ हइयै नाइ है, आदमी एक अकेल शरीर है तौ महतारिन का बच्चा केर सर्वेसर्वा कहा जात है । बाप के बारेम कोई नजानै न पूछै न बतावै न जरुरत परै । हाँ महतारी जौ चाहै तौ परिचय कराय देय औ बापौ अपने बच्चा के साथे जौ चाहै तौ थोरा सुख लै सकत है । नाइ तौ कौन काम < एक संतान तक तौ सोंच मा आय सकत है लकिन दोसर केर कल्पना नाइ है । ई मारे भाई, बहिन, पतोह, दमाद, भौजी, बहनोई, सास ससुर, साला, साली, भतीज भतीजी, काका, काकी, मौसी मौसा फूफू फूफा कोई नाता, कोई नाम होतै नाइ है । संसार मा मनई के भीडमा अकेल आदमी । कम्प्युटर, रोबोट औ कुकुर, बिल्ली के साथ ।
आदमी भावनाशील नाई रहिगा है, भौतिक प्राणाी भर बनावा गा है । बिरवा वृक्ष मेर जौ न कहौ तौ बुद्धिमान जानवर कहा जाई । मनइन के बिच्चेम रहत है लकिन अकेल है । समाज बिहीन । औरत के बच्चा पैदा करैक एक और तरीका है । कृतिम गर्भाधान । मर्द केर कोई काम नाइ रहिगा है । ई मारे अब दुनिया स्त्री जाति पर निर्भर है, मर्द माने कुछ नाई ।
जब परिवार, नाता रिस्ता, सामाजिक सम्बन्ध केर जाल हइयै नाही, तौ महतारी, बाप, परिवार पालन पोषण, बच्चेन केर पढाई, घर,दान, धर्म, तीर्थ ब्रत देवी देवता कुछ जरुरतै नाइ है । सब कुछ सिस्टम पर यन्त्रवत है । प्रकृति जब सबका अकेल औ स्वतन्त्र पैदा करत है तौ जानबुझि के बन्धन काहे बनावा जाय < दुनिया मा तमाम जीवजन्तु हैं सब मस्त रहत हैं । बस एक फरक का है कि आदमी के तीर बुद्धि है । तौ बुद्धिमान के नाते आदमी का सुविधावाला निवास औ भोजन पानी केर बडिहा व्यवस्था हइयय है । काम खतम । अब A I औ ROBOT के दुनिया मा आदमी रहत है । सब काम रोबोट औ मशीन से होत है आदमी घुमन्ते मेर है । न बीसा न पासपोर्ट । दुनिया सबकै होय । अब मान्यता यी है कि सब फसाद केर जरि परिवार है । बच्चा का नर्सरी औ स्कूल, जहां महतारी राखि पावै । जवानी मा जे कोई जतना पैसा बनाय पावै सब उके अकेल केर होय । बीमारी औ बुढापा अपन कमाई औ बचत से जस बिताय पाव । नाही तौ सडक सरकारी हइयय है ।
-२_
रोमा केर बिटिया आठ बरिस कै होय गै है । किस्सा कहानी सुनावै औ ज्ञान देय के खातिर बालगृह मा आज पुरान जमाने केर बची बचाई ९० वर्ष केर एक बूढी अतिथि लीला बोलाई गई है । लीला अबही टनटन है । बालगृह के संरक्षक संरंक्षिका सबलोग लीला कै आवभगत किहिन औ लरिका बिटियय सब साथेन खाइन पिइन औ किस्सा सुनै बैठि गए ।
पहिले दिने एक रोबोट जी आए हैं । सबसे पहिले उइ वालस्क्रीन पर एक भीडियो देखावै लागे । महाभारत केर लम्बी कहानी । मथुरा, वृन्दावन, हस्तिनापुर कुन्ती औ पवन, सूर्य, इन्द्र अग्नि से संतान जन्मना, आदमी अंतरध्यान होना, प्रकट होना, आकाश यात्रा, यमराज औ इन्द्रलोक, ब्रह्मलोक, गोलोक कै यात्रा, कई सौ वर्ष या हजार वर्ष कै आयु । एकलव्यका मट्टी के गूरु से विद्या सीखना कौरव, पाण्डव युद्ध । तब लीला बोल परीं कि ई सब तौ हमरे बालपन मा सुना किस्सा कहानी होय, नितान्त कल्पना औ गप्प होय । तब हुवाँं उपस्थित बालगृह कै और मनई बोलें कि हां तनिक मनिक बडिहा कल्पना है । रोबोट भाई चुप्पै रहे । लीला कहिन कि अच्छा इका हटाव । हम देखाई तउन किस्सा देखौ ।
तब लीला एक पेन ड्इव निकारिन औ कम्पूटर मा लगाइन् । कोठा के वालस्क्रीन पर भिडियो चलै लाग ।
इशवी सन् २००० के आसपास केर एक गांव देखाय लाग । लम्बे लम्बे घर,र्इंटा औ माटी पत्थर केर दीवाल , जादातर फूस केर छप्पर, कोई एक घर पर टीन औ एक छोटुवार पक्की कोठरी । गांव के आसपास वन जंगल । सबेरे सुर्ज निकरै केर टाइम है । कोई घरमा ५,७ । कोई घरमा १०, १५ औ कोई घरमा तौ पचासौ से जादा आदमी, नर नारी, दुधमुहा बच्चेन से लैकै १०० वर्ष के आसपास या कुछ जादा उमिर केर वृद्ध, वृद्धा । सब घरमा आदमी भरे हैं । कोइ कोर्ई धोती, कमीज, साडी, बिलाउज, जम्फर, लेहगा, गुन्यु, चोली, लंगोटी, भगवा,पैजामा, नेकर बनियाइन, सदरी, सलूका आदि पहिरे है । पांव सबकै लगभग नंगे । धूरभरे सडक औ घर आंगन । गाय भैंस केर बग्गर ।
कोई आदमी गाय भैंस लैकै जंगल के ओर चला, तौ कोई बर्द या भैंसा केर गोईं, हर, माची, फरुवा कुदार लिहे खेत जाय रहा है । कोई जोत रहा है तौ कोई पकी तयार फसल काटत है । कौनौ महतारी कटोरियम भात लिहे लरिका बिटियन का खवावत है । कोई औरतें बरतन चौका, झाडू बढारु मा जुटी हैं । गांव से कोस भर दूर कोई जिमीदार अपन लरिका पढावै खातिर शहर से एक मास्टर अपने गांव मा लाए हैं तौ आसपास केर गांव केर बडमनइन के एक्का दुइया लरिका हुंवाँ पढै जात हैं । वैसे पढै लिखैक कामै नाइ है । खायक दाना है तौ खेती करो । सब कर हर के तर । काम खतम । एक लरिका बस्ता मइहन किताब धरे औ हाथे मा तखती बुतका लिए है । स्कुलिम अपने बैठै के खातिर कांधे पर बोरा केर एक पल्ली धरे पढै जात है ।
देखत देखत संझा समय देखान । तब सब घरन मइहन अरसी या कडू तेलकेर चिराग औ कोई कोई घरे मट्टी तेल केर ढेबरी बरै लाग है । घर कै मनइृ औ पहुना घरमा चौकम बैठि के एक साथे खाना खात हैं । तकै दुवारे पर बैठि के कोई हुक्का पियत है तो कोई डली तमाखु पान खात है । कोई कोई के दुवारे पर दुइ चार मनई बैठे बतकही करत हैं, हँसत गावत हैं, तोता मैना, रानी शारंगा किस्सा कहानी , कहूं रामायण, कहूं आल्हा, कहूं ढोला मारुवा गावा जात है ।
घरमा स्त्री पुरुष केर अलग अलग खटिया बिस्तरा है । कोई लरिका बिटिया महतारी तीर, तौ कोई बाप के साथे पहुडत है, औ किस्सा कहानी से संसकारित होत हैं ।
एक मनई खरिहान से लडिहा पर गल्ला लादि के घर के ओर जात रहै । गांव मइहन लडिहा केर एक पहिया सडक किनारे गडहम खलिआय गै । औ बर्द नाय खैंचि पाइन तब रस्ता चलइया औ परोसी निकरि परे । कोई पाछे से तौ कोई कोई पहिया पकरिके ढकेल दिहिन, लडिहा निकरि गै । एक घरे कोई जनाना के बच्चा पैदा होय वाला है । गांव केर बूढ पुरनिया जनइया मेहरुवै अपन घर कै काम काज छोडि के सहयोग मइहन दौरि परी हैं, तन्तर मन्तर भुइंहार नाउत बैद सब जुटे हैं । जिससे जौन होइ पावत है, करत है । तले दोसरे टोल्ला से हल्ला भवा आग लागि गै आग । कोई केर घर कै छपरा भर भर भर भर बरै लाग रहै । सब लँग से मनई बालटी, डोर, हंसिया फरुहा, जिके हाथेम जौन आवा लैकै दउरि परा । कोई कुंआं से पानी भरत है, कोई पानी लैकै घर बुझावत है कोई घारिम बंधे पसन केर डोरी काटि के बाहेर भगावत है, कोई घरमा से सामान बाहेर करत है । तनिक देर मा आग बुझि गै कौनौ खास नकसान नाय होय पाइस ।
ई भिडियो देखतै २० वर्ष कै एक युवती संरक्षिका बोलि परी कि अतना गंदा, जंगली मनइन केर बस्ती < हर घरी दुई चार जने के मदत पर जीवन चलै < दुसरे आदमी के सहारा बिना तौ कामै नचलै । ई झूंठ गप्प होय । ई मेर आदमी ई धरती पर कब्भौ न रहा होई । तब औरौ सब संरक्षक कहै लाग कि हाँ ई बिलकुल झूठ, निहाइत कल्पना होय ।
तब लीला कहिन कि नाही । महाभारत, रामायण तौ कल्पना होय। लकिन जौन अब्बै देखत गेव ऊ सब सोरहौ आना सांच होय, हमरे युग कै सही कहानी होय । जब AI औ ROBOT केर जमाना आवा औ पूरे ज्ञान विज्ञान टेकनालोजी समाज औ व्यवस्था पर विज्ञान केर कव्जा भवा तब पुरान समाज खतम भवा है ।
संरक्षकन मइहन एक बूढ आदमी रहै ऊ बोला कि बहिनी ई सब कुछ साँंच होय । तुमलोग तौ रोबोट युगमा आंखी खोलेव औ वतना भर जानत हौ जतना प्रविधि बतावत है । हम तौ कहित है कि ऊ जमानेम आदमी भला स्वतन्त्र सोंचि तौ सकत रहै । लकिन अब तौ वतना भर होई जतना AI ठीक मानी । लकिन अब AIका चाही कि प्रविधि कइहन ७५ बरिस पाछे लैजाय, औ मनई कइहाँ मुक्ति देय ।
अतना बतकही होतै भरेम चार पांच रोबोट आयके ठाढ होइगे । उमा से एक बोला कि जौन रामायण औ महाभारतकालीन घटना औ विकास है वहौ सब सही है, हम भूतकाल मा प्रवेश कइकै सब देखित है । लकिन समयचक्र पाछे मुहका नाय चल सकत है, आगे चली । अबही तक, भौतिक विज्ञानमा अध्यात्मिक सोंच बिलकुल छोडि के मनई केर जाति, बिना मनई के सहयोग के कसकै जिन्दा रहि सकत है इकै परिक्षण भवा है । औ दया, माया, सद्भाव, परोपकार, त्याग, भाव संवेदना, प्रेम, परिवार औ समाज के बिना मनई कइहा रहै के लायक बनावा गवा है । ।सब जगह तौ हम रोबोट लोग काम करित है । शिक्षक, डक्टर, सर्जन, इन्जिनियर, लेखक, कवि, लेबर, ड्रइभर, पाइलट, किसान, मनई केर प्रेमी प्रमिका तक हमही लोग बनिकै सब काम मनई से सफा, सुरक्षित और टाइम से कीन जात है । आदमी तौ हमका अपरेटिंग मा सहयोग करत है औ सब क्षेत्रमा हमलोगन से मिलकै तनिक तनिक काम करत है ।
लकिन आदमी का जौ अबहू सुख सन्तोष नहोई लकिन आदमी का जौ आजौ सुख नाइ है तौ अबही वैज्ञानिक विकास केर एक चरण और बाकी है । -१_अब बच्चा जनम लेतै उकै पेट केर आपरेशन कइकै आँती भोंड निकार दीन जाई जिससे भूंख ना लागै । -२_ औ मनई कइहा चिरइया मेर उडै लायक बनावा जाई । इससे दुनिया केर सारी समस्या खतम होई जाई ।
लकिन अगर तबहू समस्या बाकी रहि जाई तौ < तब का करत जइहौ < लीला पूंछि बैठीं ।
रोबोट बोला कि तब तौ वहै होई जौन होत आवा है । मने फिर परिवर्तन । काहे से हम रोबोट औ अत्यधिक विकसित ज्ञान औ प्रविधि, उमिर तौ सबकै निश्चित है ना । बहुत चली तौ एक सौ पूस्ता । कुल मिलायके लगभग ५०, ६० वर्ष । माने सन् २१५० या औरौ धइलेव तौ सन् २२०० । तबतक धरती के सतहौ मा बहुत परिवर्र्तन आइ जाई । न जानी कौन भूमि, औ कत्ते पहाड औ नदी समुद्र ,यहर से वहर हाय, मिटै, नये बनैं । ई जुग मा विज्ञान अबही तक अध्यात्म औ नैतिकता के बिना अकेलै भौतिक धरातल पर काम किहिस है लकिन जब विज्ञान अपने अन्तिम यात्रा, विकास के आखिरी विन्दु पर पहुंच जाई औ आगे जायकेर जगह नरहिजाई । तब, विज्ञान घमण्ड औ अकड छोडि के, एकदम नरम होई जाई औ परिक्षण से सिद्ध नहोइ गएतक सिद्धान्त नमानैवाला विज्ञान बिना जिद्द किहे,बिना कुछ सिद्ध भए,अध्यात्म कै पहिल सिद्धान्त का अपन अंतिम सिद्धान्त मानि ली औ घोषणा कइ दी – “ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या” ।
तब विज्ञान न अकेल चली, न तौ आगे चली । अध्यात्म , जिमा दया, क्षमा, परोपकार, नैतिकता सहकार्य,औ समाज रही । औ विज्ञान जिमा अनुसन्धानात्मक प्रवृत्ति है, साहस है औ अंधविश्वास से मुक्ति है । ई दूनौ का मानव के अध्यात्मिक विकास के खातिर भौतिक विकास करै केर अन्तिम लक्ष्य लइकै साथे चलैक परी । दुनिया एक नई सोंच औ नई संभावना लइकै आगे बढी, बढतै जाई तौ समय चक्र पर वहै सहयोगी सहधर्मी समाज, एक सुसंस्कृत शुद्ध बुद्ध समाज, लीलाजी कै समाज फिर आगे आइके भेटाइ जाई ।
अस बात है तौ दौरत, कूदत फांदत पूरा चक्कर लगायके जब फिर यही जगह पर आवैक है तौ ई अकारण दौड काहे खातिर होत है अध्यात्म से विज्ञान केर प्रतिद्वंदिता काहे है ? विज्ञान का तौ ई सत्य स्वीकार कै लेक चाही औ दुनौ का मित्रवत साथ साथ चलैक चाही । अनावश्यक विध्वंश काहे होय ? लीला कहिन ।
तब रोबोट बोला कि आप लोग आदमी केर जाति अतृप्त, उच्च महत्वाकांक्षा, तृष्णा, सुखभोग, निजी स्वारथ औ अहंकार से ई सब करत करावत हौ । ई सब चीज हम रोबोट लोगन तिर तौ है नाई, औ आदमी विज्ञान का खेलौना बनायके खेलत है तब विज्ञान औ विज्ञान केर संतान हम रोबोड औ AI केर कौन दोष है ?
हुवाँ उपस्थित आदमी औ कम्प्यूटर, मशीन, रोबोट सब एक दूसरे केर मुह ताकै लागे ।
ayodhya.p.shrivastav@gmail.com
-लेखक पूर्व प्राध्यापक,प्रशासनिक अधिकारी,राजनीति औ दर्शनशास्त्र कै अध्येता, अधिवक्ता होंय _
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