जेन जी आन्दोलन

आन्दोलन तौ युवकन केर होइबै करै लकिन ई शताव्दी कै युवक आन्दोलनन केर दिशा लक्ष्य ओ नतीजा कुछ औरी मेर देखात हैं । ई मारे इका तनिक समझैक परा । सन् २०१० मा ट्यूनिशिया के  बौआजी नाम केर सव्जी औ फलफूल कै ठेला लगावैवाला स्ट्र्ट वेण्डर एक युवक कै ठेला पुलिशवाले जफत कै लिहिन तौ बौआजी आत्मदाह कै लिहिस औ जनवरी २०११ मा उकै निधन होइ गवा । बस युवक आन्दोलन शुरु भवा तौ अरबिक भाषा भाषी मध्यपूर्व से लइकै लीबिया, यमन औ मिश्र मा सरकार गिरी औ मोरक्को, अल्जीरिया, सूडान, जोर्डन, ईराक, सीरिया, सऊदी अरेबिया,कुबैत औ बहराइनमा निरंकुशता के विरुद्ध आन्दोलन भवा । ई आन्दोलन के लहरका “अरब स्प्रिंग” कहा गवा  ।

    फिर सन् २०२४ अगस्त मा बंगला देश मइहा विद्यार्थी आन्दोलन भवा जिमा प्रधानमंत्री कै तखतापलट औ नई सरकार बनी ।

   फिर तौ ई ग्लोबल वेव नेपाल मा आवा । वि सं २०८२।५।२३ औ २४ का जेन जी आन्दोलन भवा जिमा ७६ लोग मारे गए । नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी एमाले के नेता औ प्रधानमंत्री खडग प्रसाद वली कै सरकार ढली । सत्ता साझेदार नेपाली कांग्रेस कै शेर बहादुर देउवा का कुटपीट औ बेइज्जती सहैक परा । पूर्व प्रधान न्यायधीश सुशीला कार्की के नेतृत्वमा काम चलाऊ सरकार बनी औ फाल्गुन २१ गते चुनाव कै घोषणा भवा है ।

    ई मेर आन्दोलन कै लहर विश्वव्यापी होतै जात है । एक अफ्रीकी आईलैण्ड मेडागास्कर, जिकै साढे तीन करोड जनसंख्या है,२५ सेप्तेम्बर मा आन्दोलन शुरु भवा, जिमा सेना खुदै जेन जी कै साथ दिहिस तौ सहजैम तख्ता पलट होइगा औ सेना कै कर्नल माइकल राष्ट्र्पति बनाएगे हैं ।

  फिर २७ सेप्टेम्बर का दक्षिण अफ्रीकी देश पेरु मइहन १८ से २९ वर्ष केर युवा पेन्सन औ मंहगाई के विषय पर आन्दोलन किहिन औ सरकार उलट गय । ई लहर अबही रुकी नाइ है । फ्रान्स, केन्या, फिलीपीन्स, इण्डोनेशिया औ टिमोर मा कहूँ धीरे तो कहूं तेज जेन जी आन्दोलन  चलतै है । इके नाते से ई देशन मा कुछ परिवर्तन केर समभावना तौ बनतै है ।

      ई जेन जी होय का < तनिक यहौ देख लीन जाय । ई अंग्रेजी शव्द Zoomer generation in the internet, जिकै अर्थ है कि हर समय इनटरनेट से जुडा रहै वाला । ई, ऊ नवा पुस्ता होय, जौन सन् १९९५ से २०१० के बिच्चेम जन्मा है । माने कि अब २०२५ मा लगभग २८ वर्ष कै है , माने १५ से २८ वर्ष तक कै युवक युवती जिनमा ९९Ü के हाथेम समार्ट फोन है, औ ९४Ü से जादा लोग इन्टरनेट औ सामाजिक संजाल से जुडे हैं,, जो स्थिर होयकै कोई लम्बी चौडी बात ना करत हैं,ना सुनैक औ ना देखैक चाहत हैं, हियाँ तक कि मोबाइलौ का सरसर सरसर देखत हैं, इनका सब काम हाली हाली होयक चाही, ई आर्थिक रुप से चिन्तित हैं , मँहगाई औ बेरोजगारी से परेशान हैं , देश ऋण से औ नेता लोग भ्रष्टाचार मा बूडे परे हैं, औ उनकै लरिके अइयासिम मस्त हैं । देश कुशासन, मनपरितन्त्र औ भाई भतीजावाद से चलत है । ऊ सबका शुद्ध सही कीन चाहै वाले नवा पुस्ता का जेन जी कहा जात है । ई नवा नाम होय ।

           जेन जी केर आदर्श होय एक जापानी कमिक्स औ एनीमी सीरिज वन पीस केर एक पात्र लूफी , जो बिजुली के खतरा के चिन्ह मेर दुई हड्डी के बिच्चे मइहन मनई केर खोपडी धरी टेढ टोपी लगावत है औ देश ओ जनता का भ्रष्ट औ तानाशाही सरकार से आजाद करावत घूमत है ।

   अब नेपाल केर जेन जी आन्दोलन का देखा जाय । नेपाल वैसे तौ वि सं २०४६ साल से अशान्त रहा है औ पंचायती व्यवस्था ढलै के बाद, खास कयकै २०६३ के बाद जब से गणतन्त्र भवा तबसे नेता लोग बिना सूँड केर हाथी होइगे हैं । सरकार औ नेता लोगन केर काम काज जनता औ देश के हित से जादा अपने निजी सुख, समृद्धि, परिवारवाद, शक्ति औ सत्ता केर भागबण्डा से बडे पदन पर अपन अपन मनइन केर नियुक्ति, सब जगह सिण्डेकेट, उद्योग कारखाना केर बिक्री औ नाश, युवा शक्ति का विदेश कमाय जायक बाध्यता,भूख, गरीबी, राजनीतिक नेतृत्व केर निरंकुशता औ देश केर मौलिक, धर्म, दर्शन, संस्कार, पहिचान, गौरव गाथा,केर क्षयीकरण, विदेशी ताकतन केर कठपुतली सरकार, अंतरराष्ट्र्यि प्रतिष्ठा गौरव मान मर्यादा कै व्यापक हानि, देश कै प्राकृतिक सम्पदा केर बिक्री, असुरक्षा, झूंठ, धोखेबाजी औ जनता का भ्रम मा राखिके शासन करना, सब कुछ अस्त व्यस्त औ बिना न्याय, बिना कानून, बिना देवाल, बिना पल्ला दरवाजा केर खुली सराय मेर देश बनाय डारिन ।

     ई कुशासन औ नेता लोगन केर भ्रष्ट चरित्र जब सामाजिक संजाल पर खुलिके आवै लाग तब जनता केर बिचार औ आवाज दबावै के खातिर ओली देउवा केर सरकार सामाजिक संजाल बंद कै दिहिस । बस युवा पुस्ता भडकि उठा औ नेतन केर पाप केर गगरी चौराहे पर तब पूmटी जब आन्दोलन जोर पकरिस औ ओली केर अत्याचारी सरकार बडी कू्ररता से ७६ जने युवक युवतिन के ऊपर अंधाधुंध गोली चलवायके मारिस औ अंत मा बडे दबावम परिकै ओली राजीनामा दइकै आर्मी आफिसमा शरण लिहिस । तब राष्ट्र्पति पूर्व प्रधान न्यायधीश सुशीला कार्की का प्रधान मंत्री बनाइन औ आन्दोलन शान्ति भवा ।

    अब जेएन जी आन्दोलन केर प्रकृति, परिणाम, वर्तमान सरकार कै दायित्व औ जेन जी कै कर्तव्य पर एक नजर डारैक परा । राजनीतिक दल के कार्यकर्ता औ शासन ,प्रशासन यन्त्र कै भ्रष्ट आचरण, कुशासन औ देश केर आर्थिक सामाजिक, न्यायिक, वैदेशिक व्यवहार आदि समस्त राज्यव्यवस्था कै दुराअवस्था के साथै सरकार केर निरंकुशता के फलस्वरुप सामाजिक संजाल पर रोक लगायके जनता कै नागरिक अधिकार तक अवरुद्ध करैक आक्रोशवश भवा जेन जी आन्दोलन केर मर्म समझब बडा जरुरी है । जिमा ७६ लोग अपन जीवन बलिदान किहिन हैं ।

   लकिन जेनजी आन्दोलन के दौरान कुछ लोग आन्दोलनमा घुसपैठ किहिन औ जेन जी के उद्देश्य से बिल्कुल अलग काम करै लागे । सिंह दरबार औ सर्वाेच्च अदालत जस भवन कै राष्ट्र्यि महत्व कै कागज अभिलेख जब जलाये जाय लागे तब जेन जी अगुवा लोग ओझल परिगे, नगरपालिका मेयर बालेन्द्र शाह  दुविधम देखाई परे औ प्रधानमंत्री बनैम किनारा काटि लिहिन ।  अचानक एक आई एन जीओ कै एक कार्यकर्ता सरकार निर्माणमा सक्रिय देखाई परे । इससे जनता मैहन कुछ बेचैनी देखाई परै लाग ।

     अब वर्तमान स्थिति देखौ । पहिल बात अब जौन सरकार है वैसे तौ लगभग सब कोई स्वतन्त्र, योग्य, ईमानदार औ कर्मठ देखात हैं, लकिन दलगत राजनीति केर अभ्यस्त औ लगभग ३२ वर्ष से उत्तेजक नारा से बंधी मनोभूमि वाली जनता केर ई स्वतन्त्र व्यक्ति के सरकार के पीठ पाछे शक्तिशाली रुपमा उपस्थिति नाय देखात है जिससे वर्तमान सरकार सब काम मा हमेशा जनसमर्थन पावै मा  शंका माने तना बतकही से लागत है । यही मारे प्रधानमंत्री तक कोई तरह से चुनाव करायके भारमुक्त होयक मनोभूमि लिहे देखाति हैं । बतकही से अस लागत है कि सरकार अपनेका कमजोर मानत है ।

   दूसर बात  जेनजी न सरकार मा है ओ न तौ संगठित है । तीसर बात राष्ट्र्पति, प्रमुख राजनीतिक दल औ गठबन्धन सरकारै केर होय,तौ राष्ट्र्प्रमुख के माध्यम से पुरान सरकार अबही सत्ताधारी है ।  राजनीतिक शक्ति औ प्रशासनिक सब शक्ति पुरान बडकए नेता के हाथेम  है, भले सबका सोझै न देखाय । तीसर बात, प्रमुख सब दल संगठित हैं, देशव्यापी प्रभाव औ राजनीतिक कार्यकर्ता सक्रिय हैं ।  आपसी गठबंधनौ बनाए हैं । उनके अनुचित कमाई केर धन सम्पति के ऊपर कोई खास कारवाई जब ऊ साइत नाय होइ पाइस तौ अब कुछ होयक सम्भावना नाय देखात है । ई मारे नेता लोग सब निर्भीक हैं, उनके उप्पर केर खतरा टरि गवा है । औ चौथी बात कर्मचारीतन्त्र आजौ उनकै गुलाम है औ अपने भ्रष्ट रस्ता पर कुशासन करतै है । पचई सबसे महत्वपूर्ण बात, संविधानमा कोई परिवर्तन न होय के वजह से चुनाव, सरकार निर्माण, मोलतोल, भ्रष्टाचार, भागबण्डा आदि समस्त कुव्यवस्था जस अबही तक रहै तैसे न रही, इकै कौनै गारंटी औ आधार प्रमाण नाइ देखात है । जब कानून औ व्यवस्था नाय बदली है तौ चुनाव के बाद सब वहै दिन वहै रात ।

    तब, तब का मदेशी आन्दोलन औ मदेशी बलिदान मेर शहीद जेन जी लोगन केर सपना औ बलिदान निरर्थक होइ जाई ? नाही । निर्रथक तौ न होई लकिन आन्दोलन समुद्र केर एक ज्वार होय । ज्वार के बाद आन्दोलन का भाटा नबनै देक चाही । चाहे जहां केर जनता होय, जनता का आन्दोलन कै गर्मी केर आभास तौ निरंतर कराए रहैक परत है नाइ तौ भाटा बनत देर नाय लागत है । इके खातिर संगठन आवश्यक होइ जात है, आन्दोलन के बाद आन्दोलनकारिन केर सक्रियता , काम विभाजन औ कर्मठता अपरिहार्य रहत है । ई सोंच के साथे जे एनजी केर मुख्य मुद्दा कि भ्रष्टाचार, कमीशनतन्त्र औ राजनीतिक सिण्डेकेट केर अंत का सर्वाेच्च प्रार्थमिकता मा राखिके निम्नलिखित काम तौ तुरन्तै करैक जरुरी है । बाकी जस समय अवस्था होय देखा जाई । 

१, ई चुनावी सरकार तौ होय औ नई सरकार जो आई ऊ देश का देखी ई बात कही जाय सकत है लकिन गैर कानूनी रुप से अंधाधुंध गोली चलाय कै हत्या करै वालेनका कानून अनुसार दण्ड केर प्रक्रिया तेज करैक परा । औ भ्रष्ट लोगन केर सम्पत्ति खोजके सरकार का नियन्त्रणमा लेक परा ।

२, महत्वपूर्ण कागज औ नक्शा तमाम राष्ट्र्यि अभिलेख जलानेवालेन पर कार्रवाई औ सजा के खातिर आयोग बनाना या और कोई कडा कदम शुरु करब यही साइत जरुरी है । 

३, शहीद परिवारके लोग एक सूत्र मा संगठित होइकै जेनजी लोगन केर संगठन बनावै उनका सहयोग सुझाव देय औ वर्तमान सरकार के काम केर निगरानी करै औ राय सल्लाह देते रहैक परा । औ आगामी चुनाव के बारेम सोंचैक परा, औ भ्रष्टाचार औ कुशासन से मुक्त करैवाले जनप्रतिनिधिन का चुनाव मा उतारै औ जितावै केर दिन रात एक कइकै प्रयास करैक परा काहे से यही बात से बलिदानी लोगन केर बलिदान सफल औ असफल होइ सकत है । 

४, चाणक्य कहिन हैं कि देश मा न्याय कै दिया बुझे से जौन अँधेर होत है उससे घना और कोई अँधेर होतै नाइ है । राजनीतिक भागबण्डा केर नेपाली न्यायपालिका मा आमूल सफाई कै जरुरत है लकिन उके खातिर संविधानै का संशोधन करैक परी जौन अब तुरन्तै सम्भव नाइ है । तब फिर एक न्यायिक निर्देशिका तौ बनावा जाय सकत है । न्यायधीश साल भरेम कतने मुद्दा कै फैसला किहिन ई देखि के न्यायधीशन केर मूल्यांकन होत है । लकिन ई देखि के मुद्दा समाप्त नमाना जाय । फैसला कै अपने तह से कार्यान्वयन तक का सब काम समावेश होयके बाद मुद्दा खतम माना जाय । काहे से नालिश दर्ता के बाद प्रतिवादी का सम्मनै जायम चार छ महिना लागि जात है । फैसला होयक बाद फैसला पूर्ण पाठ तयार होयम ६। ७ महिना लागत है । कब्भौ तौ औरौ जादा । फिर पुनरावेदन केर म्याद तौ हाली ताली जातै नाइ है । नापी सर्जमीन के खातिर तौ जौन है सब जानत है । ई सब के खातिर समय ताेिक के सम्बन्धित कर्मचारीका बाध्यात्मक नियम मा जकडैक परा । औ अख्तियार का सक्रिय करैक परा ।  तब तनिक मनिक अंधेर हटि सकत है ।

५,ट्रफिक प्रहरी भारत मैहन बिलायती अवशेष होय जिकै काम सडक पर पैसा असूली के अलावा और कुछ न होय । नेपाल मैहन भारत केर नकल करैक जरुरत नाइ है । ई संगठन तुरन्त खारिज करैवाला है । औ प्रहरी केर घुमुवा प्रहरी, माने तस्करी केर लाइन मैन । वहू खारिज करैक परा ।

६, सिडिओ का अख्तियार, हातहतियार, विस्फोटक, सार्वजनिक अपराध आदि पहिले मेर अधिकार दइकै शक्तिसम्पन्न बनावैक परा ।

७, सरकारी कर बुझावै पचासन कोस जाव औ घूसौ देव, ईका तत्कालै रोकै के खातिर घर से  अनलाइन कर बुझायके काम खतम करैक व्यवस्था होयक चाही । औ यातायात कार्यालय सब जिला मा करैक परा ।

८, कुछ अड्डा औ हाकिम तौ सोझै कहि देत हैं कि कानून मइहन लिखे से का होत है हम तौ ई काम न करबै, या तौ अस धीरे धीरे काम करत हैं कि सालन लागै औ अदालत आदेश देय तहुं न काम आगे बढावै  । जैसे कम्पनी रजिष्ट्रर कार्यालय से निष्क्रिय कम्पनिन का खारिज न करना, कोर्ट मैरिज मा सम्बन्धित वार्ड कै सिफारिस मागना,नागरिकता वितरण मा कुछ तौ कानून कुछ तौ जस हाकिम तस काम । जहाँं कानून साफ बना है, वहौ काम करै के खातिर स्थानीय सिफारिस माँगना औ बाप महतारी औ लरिकन केर नागरिकता पेहौ होय के बाद नाता प्रमाणित मागना, सिफारिस के खातिर सर्जमीन करना आदि ।

९, शिक्षा औ स्वास्थ्य बडा जरुरी क्षेत्र है लकिन ई काम चलाऊ सरकार तमाम विषय देखै खातिर समय पावब कठिन देखात है ई मारे फिलहाल धीरज धरैक परी ।

१०, विदेशी सम्बन्ध सुधार केर प्रक्रिया शुरु करैक परा ।

                              ंंंंंं      इति

6 thoughts on “जेन जी आन्दोलन

  1. अभिषेक जौहरी । हर्षादित्य शक्तिपीडा says:

    मेरे करकोटा वंश के अति प्रतिभाशाली व्यक्ति एवं मेरे ताऊ जी को मेरे एवं हमारे भारतवंशी लोगों की तरफ से प्रणाम, मेरी आपसे संपर्क करने की अभिलाषा है। मैं भी 28 वर्ष का ही हूं ताऊ जी।

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